8 दिन की तबाही के बाद ईरान पड़ोसियों पर नरम… लेकिन जंग अभी ठंडी नहीं!

आशीष शर्मा (ऋषि भारद्वाज)
आशीष शर्मा (ऋषि भारद्वाज)

मिडिल ईस्ट में 8 दिनों से मिसाइलें बरस रही हैं, शहर जल रहे हैं और दुनिया सांस रोककर देख रही है। इसी बीच ईरान ने अचानक अपने पड़ोसियों से माफी मांगकर नया दांव चल दिया है। सवाल यह है क्या यह सच में शांति की शुरुआत है या सिर्फ युद्ध की रणनीतिक चाल?

मिडिल ईस्ट में जंग का आठवां दिन: तबाही का सिलसिला जारी

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध अब आठवें दिन में प्रवेश कर चुका है और हालात लगातार भयावह होते जा रहे हैं। अमेरिका और इजरायल की एयरस्ट्राइक के जवाब में ईरान भी ड्रोन और मिसाइल हमलों से जवाब दे रहा है।

इस टकराव की आग में सिर्फ तीन देश नहीं बल्कि करीब 15 देश किसी न किसी रूप में प्रभावित हो चुके हैं। तेल बाजार से लेकर वैश्विक राजनीति तक, हर जगह इसका असर दिखाई दे रहा है।

अचानक बदला ईरान का सुर

लगातार हमलों और भारी नुकसान के बीच ईरान ने अपने पड़ोसी देशों से माफी मांगते हुए अब नए हमले नहीं करने का संकेत दिया है। यह बयान ऐसे समय आया है जब पूरे क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां चरम पर हैं और किसी भी क्षण हालात और बिगड़ सकते हैं। मेरा मानना है कि यह कूटनीतिक चाल भी हो सकती है, जिससे ईरान अंतरराष्ट्रीय दबाव कम करना चाहता है।

आठ दिन में कितनी तबाही

आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान में अब तक 1300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। सिर्फ आठ दिनों में 1300 से ज्यादा एयर और मिसाइल हमले दर्ज किए गए हैं।

इन हमलों में कई अहम ठिकाने तबाह हुए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  1. मेडिकल सेंटर
  2. एयरपोर्ट
  3. मिसाइल बेस
  4. यूनिवर्सिटी और स्कूल
  5. स्टेडियम और सैन्य ठिकाने

कई शहरों में बिजली और पानी की सप्लाई भी ठप हो चुकी है।

अमेरिका की रणनीति: युद्ध लंबा खिंच सकता है

अमेरिका ने साफ संकेत दिया है कि यह संघर्ष जल्दी खत्म होने वाला नहीं है। वॉशिंगटन ने इजरायल को 151.8 मिलियन डॉलर के नए हथियार देने का ऐलान कर दिया है। साथ ही अमेरिका ने दावा किया है कि उसने ईरान के 300 से ज्यादा मिसाइल लॉन्चर नष्ट कर दिए हैं।

यह कदम दिखाता है कि अमेरिका युद्ध को रणनीतिक दबाव के जरिए लंबा खींचने की तैयारी में है।

ईरान का पलटवार: 13 देशों में हमला

सीधे अमेरिका पर हमला करना ईरान के लिए आसान नहीं है, इसलिए उसने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमले किए:

  • UAE
  • कतर
  • बहरीन
  • जॉर्डन
  • इराक
  • कुवैत
  • ओमान
  • सऊदी अरब
  • साइप्रस
  • सीरिया
  • तुर्किए
  • अजरबैजान

ईरान का दावा है कि इन हमलों में कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा है।

तेल और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

युद्ध का सबसे बड़ा असर ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट बंद किए जाने के बाद कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। यह वही समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई गुजरती है। अगर यह लंबे समय तक बंद रहा तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव पड़ सकता है।

ट्रंप की चेतावनी और नई सियासत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को आखिरी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर ईरान बिना शर्त सरेंडर नहीं करता तो हमले और तेज किए जाएंगे। ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि ईरान का अगला नेता भी अमेरिका की पसंद का हो सकता है। हालांकि ईरान ने इस बयान को खारिज करते हुए कहा है कि वह एक संप्रभु राष्ट्र है और उसका नेतृत्व देश की जनता ही तय करेगी।

क्या जंग थमेगी या और भड़केगी?

ईरान के माफी वाले बयान के बावजूद हालात अभी शांत होने के संकेत नहीं दे रहे। अमेरिका और इजरायल लगातार सैन्य दबाव बनाए हुए हैं, जबकि ईरान भी जवाबी हमले जारी रखे हुए है। कूटनीति और युद्ध के इस खतरनाक खेल में फिलहाल दुनिया को सिर्फ एक सवाल परेशान कर रहा है क्या यह संघर्ष यहीं थमेगा, या फिर मिडिल ईस्ट की आग पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले सकती है?

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